कलेक्टर सुश्री शीला दाहिमा ने कहा कि जिले की विरासत के रूप में प्रसिद्ध काष्ठकलां के साथ ही अन्य हस्तशिल्प लाख, जरी-जरदोजी तथा ब्लॉक पेंटिंग आदि को बढावा देने का कार्य किया जायेगा, इस कलां के संरक्षण हेतु इससे जुडे शिल्पियों के लिए शासन निर्धारित सुविधाओं का लाभ देने के साथ ही अन्य सहयोग भी प्रदान किये जायेंगे। वे आज एनआईसी कक्ष श्योपुर में आयोजित हस्तशिल्पियों की बैठक को संबोधित कर रहीं थी।
बैठक में सीईओ जिला पंचायत श्री कार्तिकेय जायसवाल, सहायक आयुक्त आदिम जाति कल्याण श्री राकेश गुप्ता, प्रबंधक खादी ग्रामोद्योग श्री राघवेन्द्र त्यागी, डीपीएम एनआरएलएम श्री सोहनकृष्ण मुदगल, सहायक संचालक उद्योग श्री शुभम अग्निहोत्री सहित विभिन्न कलांओ के शिल्पी मौजूद रहें।
कलेक्टर सुश्री शीला दाहिमा ने कहा कि हस्तशिल्पियों को उनकी आवश्यकतानुसार संसाधन उपलब्ध कराने के प्रयास किये जायेंगे, खराद कलां से जुडे शिल्पियों द्वारा इमारती लकडी की उपलब्धता के संबंध में ध्यान आकृष्ट कराये जाने पर उन्होंने कहा कि इसके लिए वन विभाग के अधिकारियों से चर्चा की जायेगी तथा समाधान कारक हल निकालने के प्रयास सुनिश्चित किये जायेगे।
इसके साथ ही अन्य प्रकार की सुविधाएं भी संबंधित विभाग के माध्यम से प्रदान करने की कार्ययोजना तैयार की जायेगी तथा हस्तशिल्प के लिए स्थापित कॉमन फेसिलेटेशन सेंटर को सुचारू करने की प्रक्रिया भी सुनिश्चित की जायेंगी। उन्होंने कहा कि हस्तशिल्पियों के उत्पादों को विक्रय के लिए कूनो फेस्टिवल सहित अन्य बडे आयोजनो के दौरान स्टॉल लगाने की व्यवस्थाएं भी कराई जायेगी।
इसके साथ ही कूनो नेशनल पार्क में आने वाले पर्यटको को श्योपुर की हस्तशिल्प कलां से परिचय कराने तथा कलाकृतियों एवं उत्पादों के क्रय किये जाने के संबंध में भी वन विभाग से चर्चा कर कार्य योजना बनाई जायेगी।
उल्लेखनीय है कि हस्तशिल्प को बढावा देने के लिए जिला प्रशासन की ओर से सतत् रूप से प्रयास किये जा रहे है, इसी क्रम में 30 सितंबर बुधवार को आरआरआर रिसोर्ट में आयोजित हो रहे रेडक्रॉस के कार्यक्रम के दौरान भी हस्तशिल्प विक्रय हेतु स्टॉल लगाने की व्यवस्था की गई है।

