इंदौर जिले में राष्ट्रीय बधिरता निवारण एवं नियंत्रण कार्यक्रम ( NPPCD) के अंतर्गत 21 से 27 सितंबर 2026 तक अंतर्राष्ट्रीय बधिर सप्ताह मनाया गया। इस वर्ष की थीम ‘ बधिर व्यक्तियों के मानवाधिकारों की घोषणा ’ रही। सप्ताह के दौरान जनजागरूकता गतिविधियों, श्रवण परीक्षण एवं परामर्श के माध्यम से बधिर व्यक्तियों के अधिकारों, सांकेतिक भाषा के महत्व तथा श्रवण स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ाने के प्रयास किए गए।

इस अवसर पर जिला चिकित्सालय सहित समस्त शासकीय चिकित्सालयों में विशेष ओपीडी एवं काउंसलिंग का आयोजन किया गया। राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के अंतर्गत संचालित दलों द्वारा विशेष रूप से बच्चों के श्रवण स्वास्थ्य पर ध्यान केंद्रित करते हुए 15 विद्यालयों एवं 25 आंगनवाड़ी केंद्रों में लगभग 4500 बच्चों का श्रवण परीक्षण किया गया। परीक्षण के उपरांत आवश्यकतानुसार बच्चों को नैदानिक परामर्श भी प्रदान किया गया।

सांकेतिक भाषा के महत्व एवं बधिर व्यक्तियों के अधिकारों के प्रति किया जागरूक

अंतर्राष्ट्रीय बधिर सप्ताह के दौरान उमंग परामर्शदाताओं द्वारा विभिन्न विद्यालयों एवं एकलव्य रेजिडेंट्स हॉस्टल, महू में विद्यार्थियों तथा स्टाफ के लिए कार्यशालाओं का आयोजन किया गया। कार्यशालाओं में प्रतिभागियों को इस वर्ष की थीम से अवगत कराते हुए बधिर व्यक्तियों के मानवाधिकारों, सांकेतिक भाषा की उपयोगिता तथा उनके प्रति संवेदनशील व्यवहार अपनाने के संबंध में जानकारी दी गई।

कार्यक्रम के माध्यम से यह संदेश दिया गया कि सांकेतिक भाषा केवल संवाद का माध्यम नहीं, बल्कि बधिर व्यक्तियों की पहचान, संस्कृति और अधिकारों की आवाज है। साथ ही आवश्यकता होने पर विद्यार्थियों एवं अन्य संबंधित व्यक्तियों को निकटतम शासकीय चिकित्सालय में श्रवण संबंधी जांच एवं नैदानिक परामर्श प्राप्त करने की सलाह भी दी गई।