बिहार से मध्यप्रदेश भ्रमण पर आए 16 सदस्यीय इंफ्लूएंसर दल ने सोमवार शाम इंदौर में उच्च शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार से सौजन्य भेंट की। विकसित भारत संकल्प यात्रा के तहत आए सदस्यों ने उन्हें प्रदेश में देखे गए स्थलों और अपनी यात्रा के अनुभवों के बारे में बताया।
महाकाल मंदिर से विक्रम उद्योगपुरी तक देखा
दल ने उज्जैन में महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग, काल भैरव, वेधशाला और वैदिक घड़ी का भ्रमण किया। सदस्यों ने सेवरखेड़ी-सिलारखेड़ी परियोजना, हरियाखेड़ी वाटर ट्रीटमेंट प्लांट, कान्ह डायवर्जन क्लोज्ड डक्ट टनल परियोजना और विक्रम उद्योगपुरी को भी देखा।
खास बातें
- बिहार से आए दल में 16 सदस्य शामिल
- उज्जैन के धार्मिक और विकास स्थलों का किया भ्रमण
- वैदिक घड़ी और भारतीय कालगणना पर हुआ संवाद
दल के सदस्यों के अनुसार यात्रा सुगम और ज्ञानवर्धक रही। इन स्थलों से उन्हें मध्यप्रदेश की आध्यात्मिक विरासत, सांस्कृतिक परंपराओं, आधुनिक अधोसंरचना और विकास कार्यों को करीब से समझने का अवसर मिला। उन्होंने 20 सितंबर को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से हुई सौजन्य भेंट को भी यात्रा का यादगार हिस्सा बताया।
मध्यप्रदेश-बिहार की साझा विरासत पर चर्चा
परमार ने बातचीत में मध्यप्रदेश और बिहार की सांस्कृतिक व ऐतिहासिक समानताओं का उल्लेख किया। उन्होंने नालंदा, गया और चंपारण को भारतीय संस्कृति, ज्ञान और परंपरा की समृद्ध विरासत के प्रतीक बताते हुए कहा कि देश की ज्ञान परंपरा भी अमूल्य धरोहर है।
उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश में विकास के साथ सांस्कृतिक, ऐतिहासिक और आध्यात्मिक विरासत के संरक्षण और संवर्धन पर ध्यान दिया जा रहा है। उनके अनुसार, अलग-अलग राज्यों के युवाओं की ऐसी यात्राएं संस्कृति, परंपराओं और विकास के तरीकों को समझने का अवसर देती हैं।
वैदिक घड़ी की विशेषताएं भी बताईं
मंत्री ने दल को उज्जैन की वैदिक घड़ी, भारतीय कालगणना और खगोलीय ज्ञान की जानकारी दी। उन्होंने प्राचीन भारतीय वैज्ञानिक परंपरा में उज्जैन के महत्व पर भी चर्चा की।
बैठक में दल के सदस्यों ने परिचय देने के साथ अपने अनुभव साझा किए। इस दौरान खाद्य नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण निगम के उपाध्यक्ष संजीव ककर, अतिरिक्त जिला पंचायत सीईओ संजय तिवारी और अन्य अधिकारी भी उपस्थित रहे।




